सरकार ने सैटकॉम सर्विस के लिए स्टारलिंक को जारी किया इंटेंट लेटर

नई दिल्ली

Elon Musk की सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस ऑफर करने वाली कंपनी Starlink पिछले लंबे समय से भारत में एंट्री की कोशिश कर रही है, अब कंपनी की राह आसान होती नजर आ रही है क्योंकि भारत सरकार की ओर से स्टारलिंक को लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया है. LoI यानी लेटर ऑफ इंटेंट संभावित समझौते के बारे में बातचीत के लिए एक मार्गदर्शक रूपरेखा की तरह काम करता है, यह इस को दर्शाता है कि दोनों पक्ष सौदे के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं. सूत्रों के मुताबिक, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम की ओर से स्टारलिंक को लेंटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे पहले जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशन और यूटेलसैट वनवेब को भी समान लाइसेंस के लिए अप्रूवल दिया गया है. लेंटर ऑफ इंटेंट मिलने का मतलब ये है कि अब स्टारलिंक अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए अगला कदम उठा सकती है, ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि सरकार की ओर से स्टारलिंक को हरी झंडी मिलती नजर आ रही है.

ये भी पढ़ें :  फिर गूंजा वसुधैव कुटुम्बकम्...X पर बना एक नया रिकॉर्ड..100 मिलियन पार, मोदी का परिवार..CM साय बोले -"वसुधैव कुटुम्बकम्"

DoT ने जारी किया लेटर ऑफ इंटेंट

स्टारलिंक सर्विस सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए दुनिया भर में हाई-स्पीड और लो-लेटेंसी ब्रॉडबैंड इंटरनेट प्रदान करती है. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि दूरसंचार विभाग (DoT) ने अब स्टारलिंक को यह लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया है. इससे पहले सरकार ने Eutelsat OneWeb और Jio Satellite Communications को सैटकॉम सर्विस के लिए लाइसेंस जारी किए थे.

लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स का इस्तेमाल करती है स्टारलिंक

ये भी पढ़ें :  Agniveer Bharti 2025 Result: 15 नवंबर तक आ सकता है परिणाम, ट्रेनिंग एक महीने आगे बढ़ी

पारंपरिक सैटेलाइट सेवाओं के विपरीत, जो पृथ्वी से बहुत दूर स्थित भू-स्थैतिक (Geostationary) उपग्रहों पर निर्भर करती हैं, स्टारलिंक धरती के करीब स्थित लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) उपग्रहों के सबसे बड़े नेटवर्क (550 किमी ऊपर) का इस्तेमाल करती है.

वर्तमान में इसके पास करीब 7,000 LEO उपग्रहों का जाल है, जो भविष्य में बढ़कर 40,000 से अधिक हो सकता है. यह नेटवर्क स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग और वीडियो कॉल जैसे कार्यों के लिए सक्षम ब्रॉडबैंड इंटरनेट सर्विस प्रदान करता है.

क्या है Starlink का मकसद?

2002 में एलन मस्क ने स्टारलिंक को शुरू किया था, इस कंपना का मकसद सैटेलाइट के जरिए दुनिया के हर कोने तक हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचाना है. स्टारलिंक अन्य सैटेलाइट सर्विस की तुलना थोड़ा अलग है, इंटरनेट देने वाली सैटेलाइट आमतौर पर धरती से 36000 किलोमीटर दूर जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में होती हैं लेकिन स्टारलिंक लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद है जो धरती से केवल 550 किलोमीटर ऊपर स्थित है. फिलहाल स्टारलिंक के पास 7000 सैटेलाइट नेटवर्क है जिसे कंपनी आने वाले समय में 40 हजार तक बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है.

ये भी पढ़ें :  GST कलेक्शन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: सरकार को मिले 1.89 लाख करोड़, 9% की उछाल

कितनी है Starlink Internet Speed?

इंटरनेट स्पीड की बात करें तो रेगुलर यूजर्स को 50Mbps से 250Mbps तक की स्पीड मिलती है, वहीं प्रीमियम प्लान चुनने वाले यूजर्स को कंपनी की तरफ से 500Mbps तक की स्पीड दी जाती है. भारत में स्टारलिंक के प्लान्स की कीमत कितनी होगी? फिलहाल इस बात की जानकारी नहीं मिली है.

 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment